उल्फ़तें, उलझनें रंजिशें और थकावट बस यूँ ही एक दिन और बीत गया ज़िंदगी का
शायरी गुलदस्ता · 242020-01-23उल्फ़तें, उलझनें रंजिशें और थकावट बस यूँ ही एक दिन और बीत गया ज़िंदगी काShare on WhatsAppCopy Linkमूल ब्लॉग पोस्ट पढ़ें