तुम्हारे साथ देखी थी, वरना ज़िंदगी मुझको न तब महसूस होती थी, न अब महसूस होती है
शायरी गुलदस्ता · 112020-01-23तुम्हारे साथ देखी थी, वरना ज़िंदगी मुझको न तब महसूस होती थी, न अब महसूस होती हैShare on WhatsAppCopy Linkमूल ब्लॉग पोस्ट पढ़ें