नज़र बचा के गुज़रना है तो गुज़र जाओ मैं आईना हूँ, मेरी अपनी ज़िम्मेदारी है
शायरी गुलदस्ता · 142020-01-23नज़र बचा के गुज़रना है तो गुज़र जाओ मैं आईना हूँ, मेरी अपनी ज़िम्मेदारी हैShare on WhatsAppCopy Linkमूल ब्लॉग पोस्ट पढ़ें