लाख समझाया कि शक करती है ये दुनिया… मगर न गई उसकी आदत हँसकर गुज़र जाने की…
शायरी गुलदस्ता · 12020-01-23लाख समझाया कि शक करती है ये दुनिया… मगर न गई उसकी आदत हँसकर गुज़र जाने की…Share on WhatsAppCopy Linkमूल ब्लॉग पोस्ट पढ़ें