तुम

कैसे कहूँ कि क्या हो तुम… चलो मैं बताता हूँ, क्या हो तुम… मेरे लिए मेरी दुनिया हो तुम… छू के जो गुज़री, वो हवा हो तुम… मैंने जो माँगी, वो दुआ हो तुम… करे मुझको जो रोशन, वो दिया हो तुम… दिल ये कहे, मेरा जिया हो तुम… किया मैंने महसूस, वो एहसास हो तुम… मेरी नज़र की तलाश हो तुम… मेरी ज़मीन का आकाश हो तुम… मेरे चेहरे की कशिश हो तुम… मेरे सितारों की गर्दिश हो तुम… मेरी ज़िंदगी का क़रार हो तुम… मैंने जो चाहा, वो प्यार हो तुम… मेरे इंतज़ार की राहत हो तुम… मेरे दिल की चाहत हो तुम… तुम हो तो ये दुनिया है मेरी… कैसे कहूँ कि मेरी जान हो तुम…
तुम — भाग 1तुम — भाग 2
मूल ब्लॉग पोस्ट पढ़ें