सदियों पे इख़्तियार नहीं था हमारा दोस्त, दो चार लम्हे बस में थे, दो चार बस जिए। — गुलज़ार
सदियों पे इख़्तियार2020-01-06सदियों पे इख़्तियार नहीं था हमारा दोस्त, दो चार लम्हे बस में थे, दो चार बस जिए। — गुलज़ारमूल ब्लॉग पोस्ट पढ़ें