शायरी गुलदस्ता · 22

जिसे ख़ुद से ही नहीं फ़ुर्सतें जिसे ख़याल अपने कमाल का उसे क्या ख़बर मेरे शौक़ की उसे क्या पता मेरे हाल का
शायरी गुलदस्ता · 22 — भाग 1
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