काँच सा जिस्म कहीं टूट न जाए हुस्न वाले तेरी अँगड़ाई से डर लगता है
शायरी गुलदस्ता · 202020-01-23काँच सा जिस्म कहीं टूट न जाए हुस्न वाले तेरी अँगड़ाई से डर लगता हैShare on WhatsAppCopy Linkमूल ब्लॉग पोस्ट पढ़ें