जुदा होकर भी दोनों जी रहे हैं एक मुद्दत से कभी दोनों ही कहते थे जुदाई मार डालेगी
शायरी गुलदस्ता · 192020-01-23जुदा होकर भी दोनों जी रहे हैं एक मुद्दत से कभी दोनों ही कहते थे जुदाई मार डालेगीShare on WhatsAppCopy Linkमूल ब्लॉग पोस्ट पढ़ें