शायरी गुलदस्ता · 17

मुस्कुराना तो मेरी शख़्सियत का एक हिस्सा है ऐ दोस्त तुम मुझे ख़ुश समझकर दुआओं में भूल मत जाना
शायरी गुलदस्ता · 17 — भाग 1
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