हर कोई देता है ज़ख़्म गिन-गिन के बेवजह… मैं किस-किस ज़ख़्म को अपना नसीब समझूँ…
हर कोई देता है ज़ख़्म गिन-गिन के बेवजह…2020-01-23♡ Save FavouriteA−A+Dark Backgroundहर कोई देता है ज़ख़्म गिन-गिन के बेवजह… मैं किस-किस ज़ख़्म को अपना नसीब समझूँ…Follow on FacebookShare on WhatsAppCopy Link