हर कोई देता है ज़ख़्म गिन-गिन के बेवजह…

हर कोई देता है ज़ख़्म गिन-गिन के बेवजह… मैं किस-किस ज़ख़्म को अपना नसीब समझूँ…
हर कोई देता है ज़ख़्म गिन-गिन के बेवजह… — हर कोई देता है ज़ख़्म गिन-गिन के बेवजह… मैं किस-किस ज़ख़्म को अपना नसीब समझूँ…