ज़ख़्म देने की आदत नहीं हमको,

ज़ख़्म देने की आदत नहीं हमको, हम तो आज भी वो एहसास रखते हैं… बदले-बदले तो आप हैं जनाब, हमारे अलावा सबको याद रखते हैं…
ज़ख़्म देने की आदत नहीं हमको, — ज़ख़्म देने की आदत नहीं हमको, हम तो आज भी वो एहसास रखते हैं… बदले-बदले तो आप हैं