क़दर करनी है तो जीते जी करो

क़दर करनी है तो जीते जी करो कफ़न उठाने के वक़्त तो नफ़रत करने वाले भी रो पड़ते हैं…
शायरी गुलदस्ता · 30 — भाग 1