रिश्तों की हक़ीक़त कोई क्या समझेगा,

रिश्तों की हक़ीक़त कोई क्या समझेगा, दिलों की ज़रूरत को कोई क्या समझेगा, मेरे दोस्त की मुस्कुराहट ही तो मेरी ज़िंदगी है, इस मुस्कुराहट की क़ीमत कोई क्या समझेगा…
रिश्तों की हक़ीक़त कोई क्या समझेगा, — रिश्तों की हक़ीक़त कोई क्या समझेगा, दिलों की ज़रूरत को कोई क्या समझेगा, मेरे दोस