निगाहों पे निगाहों के पहरे होते हैं…

निगाहों पे निगाहों के पहरे होते हैं… इन निगाहों के घाव भी गहरे होते हैं… न जाने क्यों कोसते हैं लोग बदसूरतों को, बर्बाद करने वाले तो ख़ूबसूरत चेहरे होते हैं…
निगाहों पे निगाहों के पहरे होते हैं… — निगाहों पे निगाहों के पहरे होते हैं… इन निगाहों के घाव भी गहरे होते हैं… न जाने