मेरे जिस्म से उसकी ख़ुशबू

मेरे जिस्म से उसकी ख़ुशबू आज भी आती है… मैंने फ़ुर्सत में कभी सीने से लगाया था उसे…
शायरी गुलदस्ता · 36 — भाग 1