करो फिर से कोई वादा, कभी न फिर बिछड़ने का… तुम्हें क्या फ़र्क़ पड़ता है, चलो फिर से मुकर जाना…
शायरी गुलदस्ता · 82020-01-23करो फिर से कोई वादा, कभी न फिर बिछड़ने का… तुम्हें क्या फ़र्क़ पड़ता है, चलो फिर से मुकर जाना…Share on WhatsAppCopy Linkमूल ब्लॉग पोस्ट पढ़ें