न जाने क्यों?

बिल्कुल लोगों के रवैयों जैसा… अब के बरस, जाने क्यों, दिसंबर भी, रूखा रूखा, सूखा सूखा, ख़फ़ा ख़फ़ा, जुदा जुदा, सा लगता है…
न जाने क्यों? — भाग 1
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